पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शुक्रवार, 3 मार्च 2017

595.....कभी एक रोमानी खबर क्यों नहीं तू लाता है

सादर अभिनादन
मौसम मे हलकी गरमी आ रही है
उत्तर भारत अपेक्षाकृत ठण्डा है
और दक्षिण भारत  गरम
एक भारत ही है जहाँ
छः ऋतुएँ होती है

आज की रचनाएँ सारी की सारी मुझे मेरे मेलबाक्स में ही मिल गई...

शुरुआत भारत दर्शन से..हमारा भारत- प्यारा भारत
पेड़ों के झुरमुट में छुपा जसवंत थड़ा
जसवंत थड़ा मेहरानगढ़ से 2 - 3 किमी दूर बाईं ओर एक बड़ी झील के किनारे है. मौसम अच्छा हो तो गढ़ से पैदल वर्ना ऑटो से जसवंत थड़ा पहुँचा जा सकता है. इस स्मारक की नींव 1900 में रखी गई और 1904 में रेजिडेंट गवर्नर ने थड़ा बनाने की मंज़ूरी दी थी. स्मारक सफ़ेद मकराना संगमरमर, लाल बालू पत्थर और गुलाबी रंग के पत्थर से मंदिर के रूप में बना हुआ है. आम तौर पर इसे जोधपुर का ताजमहल भी कहा जाता है

लागे न जिया
फागुन का महीना
आ जाओ पिया
गर रखते हो भावुक हृदय,
मत तोड़ना किसी हृदय की आशा,
समझो आँखों की विवश भाषा,
आशाओं में बसता इक जीवन,

चाँद के आँगन जा उतरी
एक याद मीठी सी
चाँदनी की डोर थामे
पीपल के पत्तो कुछ देर
थम गयी अलसायी सी
पिघलती नमी यादों 

बहुत देर हुई, 
होंठों पे नज़्म का ज़ायका महसूस किए 
ख़ामोशी कब्र सी ना जाने कब से बिखरी है.. 
रातें देर तक ऊँघती हैं, 
पड़ी रहती है छत पर सितारे ओढ़े 

गीतिका....कालीपद "प्रसाद"
कहीं धमकियां तो कहीं गालियाँ 
चरम पर चली बेरहम गोलियाँ | 

चुनावी लड़ाई की ये आँधियाँ 
मिटाती शराफत की पाबंदियाँ | 




बात पते की...डॉ. सुशील जोशी
ऊल जलूल 
कुछ भी 
नहीं कहा 
जाता है 
....
तब तू भी 
ऎसा कुछ 
कालजयी 
लिखने की 
कला सीखने 
के लिये 
किसी को 
अपना गुरू 
क्यों नहीं 
बनाता है 

आज बस इतना ही
आज्ञा दें यशोदा को
सादर








9 टिप्‍पणियां:

  1. 'जसवंत थड़ा' को शामिल करने के लिए धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर सूत्र ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से आभार यशोदा जी !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर संकलन, मेरी रचना को शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद यशोदा बहन |

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह आज तो इतनी सारी टिप्पणियाँ देख कर दिल खुश हो गया। बहुत सुन्दर प्रस्तुति । मेल में ही इतनी सारी रचनाएं इक्ट्ठा मिल गई गजब है। 'उलूक' प्रसन्न है औरा आभारी भी यशोदा जी का उसके सूत्र 'कभी एक रोमानी खबर क्यों नहीं तू लाता है' को जगह भी और शीर्षक पर स्थान भी देने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुभ प्रभात भैय्या जी
      जिस ब्लॉाग में फॉलो का ऑप्शन नही रहता
      उसे मैं फॉलोड बाई ईमेल के द्वारा फॉलो कर लेती हूँ
      सादर

      हटाएं
  5. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...