पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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रविवार, 19 मार्च 2017

मेघ की बेचैनी. .....611

नमस्कार दोस्तो 

सुप्रभात  
उत्तरप्रदेश मे तो योगी राज आ गया  । 
  दोस्तों  जीवन मे सुख -दुख और हानि - लाभ रात-दिन की तरह है जिस प्रकार रात के बाद दिन होता है  उसी प्रकार दुख के बाद सुख जरूर आता है, इसलिए दुख से नही घबराना चाहिए ।

        आइए अब चलते है आज की पाँच लिंको की ओर. . . . . .  

मेघ की बेचैनी

          इस यक्ष को अब मेघ से ईर्ष्या हो गई थी । मेघ को अब दूत बनाने के ख्याल से वह शंदेह के बादलो से घिर गया था।
              वह प्रेयसी का सौंदर्य वर्णन नहीं करना चाहता था।उसे डर था उन तालों में कितनी नवयौवना के झांघो पर दृष्टि से नजर फिसले कही वो उसी से मोहित न हो  जाए। आखिर कुछ भी है ,है तो इंद्र का दास ही। उसकी लोलुपता और गौतम के श्राप को कौन नहीं जानता।

छड़ी कबूतर



कबूतर तो वही कर रहे थे जो वे न जाने कब से करते आ रहे हैं. लेकिन अनुज और अजय क्यों उलझ गए! इस उलझन से निकलना आसान नहीं था.और फिर ऐसा क्या हुआ. ..
             
अनुज दोपहर में दो बजे स्कूल से लौटता है. आते ही माँ गरम भोजन परोस कर कहती हैं –खाकर कुछ देर आराम कर ले,फिर..’ फिर उसे ट्यूशन पर जाना होता है- ठीक चार बजे. इस दिनचर्या से रविवार को ही छुटकारा मिलता है. भोजन के बाद अनुज जैसे जबरदस्ती लेट जाता है. कभी नींद लग जाती है तो कभी इसी सोच में समय बीत जाता है कि रविवार के दिन दोस्तों के साथ कैसे मस्ती करेगा.       

दर्द ...

अपना अपना अनुभव है जीवन ... कभी कठोर कभी कोमल, कभी ख़ुशी तो कभी दर्द ... हालांकि हर पहलू अपना निशान छोड़ता है जीवन में ... पर कई लम्हे गहरा घाव दे जाते हैं ... बातें करना आसान होता है बस ...

लोग झूठ कहते हैं दर्द ताकत देता है
आंसू निकल आएं तो मन हल्का होता है
पत्थर सा जमा
कुछ टूट कर पिघल जाता है

उलझन

आजकल मैं उलझन में हूँ.


देख नहीं पाता खुद को

आईने में,
सुन नहीं पाता
अपनी ही आवाज़,
रोक नहीं पाता खुद को 
चलने से.

फेस बुकिया कैसे कैसे


कई लोग फेस बुक पर इस तरह लाईक करते नजर आते हैं मानो कोई नेता रोड़ शो में सबका हाथ हिला हिला कर अभिवादन कर रहा होदेखा पहचाना किसी को नहींहाथ हिलाया सबको.इनका संघर्ष मात्र इतना सा है कि आप देख लो कि यह सक्रिय हैं और आपको पसंद करते हैं.

   अब दीजिए आज्ञा 
विरम सिंह 

8 टिप्‍पणियां:

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