पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

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सोमवार, 16 जनवरी 2017

549......ताजी खबर है देश के एन जी ओ ऑडिट नहीं करवाते हैं

सादर अभिवादन
सोलह एक सत्रह
गणित चलता ही रहता है
आज से नौ दिन बाद
एक राष्ट्रीय पर्व आने वाला है
दिन गुज़रते जा रहे हैं और
एक के बाद एक कील
हमारे ताबूत में ठुकती चली जा रही है अनवरत..
है न गहरी बात..
किसी फिल्म का एक डॉयलाग याद आ रहा है
जब ज़िन्दगी के दिन कम बचे होें तो डबल जीने का...
ये फिलासफी यहीं तक....
आगे बढ़ते हैं.....

जरा सा चूमकर, उनींदी सी पलकों को,
कुछ देर तक, ठहर गई थी वो रात,
कह न सका था कुछ अपनी, गैरों से हुए हालात,
ठिठक कर हौले से कदम लिए फिर,
लाचार सी, गुजरती रही वो रात रुक-रुककर।

शिव, अपना तीसरा नेत्र खोलो,
तो कुछ ऐसे देखना 
कि जल जाय एक-एक कर सब कुछ,
पर बची रह जाय आख़िर तक 
जाड़े की यह गुनगुनी धूप.

प्रीत पुरानी 
यादें हैं हरजाई 
छलके पानी। 

नेह के गीत 
आँखों की चौपाल में 
मुस्काती प्रीत


दुश्चिंता.... साधना वैद
ज़िंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर
अब तक चलती आई हूँ
तुम्हारा हाथ थामे !
कभी हाथों में संचित
चंद पाँखुरियाँ बिछा कर


आंसुओं का बोझ...मंजू मिश्रा
देखो...
तुम रोना मत 
मेरे घर की  दीवारें
कच्ची हैं 
तुम्हारे आंसुओं का बोझ 
ये सह नहीं पाएंगी 


उस पार का जीवन... सुशील कुमार शर्मा
है शरीर का कोई विकल्प
या है निर्विकार आत्मा
है वहां भी सुख-दु:ख का संताप 
या परम शांति की स्थापना।


आज का शीर्षक.......
ना थाने 
जाते हैं 
ना कोतवाल 
को बुलाते हैं 
सरकार से 
शुरु होकर 
सरकार के 
हाथों 
से लेकर 
सरकार के 
काम 
करते करते 
सरकारी 
हो जाते हैं । 

मेरे व्यथित दिमाग ने एक गलती कर डाली है
सभी को सत्रह तारीख की सूचना दे दी हूँ
नज़रअंदाज कर दीजिएगा

इज़ा़ज़ मांगती है यशोदा

इस डांस को देख कर मन हलका कर लीजिए

















रविवार, 15 जनवरी 2017

548..जिंदगी कुछ यूँ भी सँवर जाती ...

      नमस्कार  दोस्तो 

सुप्रभात 
आज 15 जनवरी को प्रस्तुत है 548 वी पोस्ट. ...✝✝✝
आज की सलेक्ट की हुई  पांच लिंक. ....✝✝✝

अब पछताये क्या होत - कहानी




विनय के घर आज हाहाकार मचा था .विनय के पिता का कल रात ही लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया .विनय के पिता चलने फिरने में कठिनाई अनुभव करते थे .सब जानते थे कि वे बेचारे किसी तरह जिंदगी के दिन काट रहे थे और सभी अन्दर ही अन्दर मौत की असली वजह भी जानते थे किन्तु अपने मन को समझाने के लिए सभी बीमारी को ही मौत का कारण मानकर खुद को भुलावा देने की कोशिश में थे .विनय की माँ के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे .बच्चे और पत्नी इधर उधर के कामों में व्यस्त थे ....नहीं थी तो बस अवंतिका.....

जिंदगी कुछ यूँ भी सँवर जाती .






तुम्हारे रुखसार पर घिरी 

ये जुल्फें जरा सिमट जातीं 
चांदनी कुछ और निखर जातीं 
ये रात शबनमी यूँ ही बरस जाती 




निबाह ज़रूरी है - -

आसपास यूँ तो आज
भी हैं ख़ुश्बू के
दायरे,
गुल काग़जी हों या
महकते हुए
यास्मीन,
निबाह ज़रूरी है
मुख़ौटे हों या
असल
चेहरे। बर ख़िलाफ़
क़ुदरत के यूँ 




झरना

झर् झर् झर् झरता है झरना .
सर् सर् सर् बहता है झरना ,
पर्वत के अन्तर में पिघली ,
करुण-कथा कहता है झरना .

रात और दिन झरे निरन्तर .
धरती को जल देता भर भर.
पत्तों को हँसना सिखलाता ,
बंजर को भी करता उर्वर .
खुद ही अपनी राह बनाता ,
अपनी धुन रहता है झरना .
झर् झर् झर् झरता है झरना .



    

व्यंग्य / "साइकिल" जो किसी फेरारी, लैंबॉर्गिनी , बुगाटी या रोल्स रायल से कीमती है ! / विवेक रंजन श्रीवास्तव

हमारी  संस्कृति में पुत्र की कामना से बड़े बड़े यज्ञ करवाये गये हैं . आहुतियो के धुंए के बीच प्रसन्न होकर अग्नि से यज्ञ देवता प्रगट हुये हैं और उन्होने यजमान को पुत्र प्राप्ति के वरदान दिये . यज्ञ देवता की दी हुई खीर खाकर राजा दशरथ की तीनों रानियां गर्भवती हुईं और भगवान राम जैसे मर्यादा पुरोषत्तम पुत्र हुये जिन्होंने पिता के दिये वचन को निभाने के लिये राज पाट त्याग कर वनवास का रास्ता चुना . आज जब बेटियां भी बेटों से बढ़चढ़ कर निकल रहीं है , पिता बनते ही हर कोई फेसबुक स्टेटस अपडेट करता दीखता है " फीलिंग हैप्पी " साथ में किसी अस्पताल में एक नन्हें बच्चे की माँ के संग तस्वीर लगी होती 


आज्ञा दिजिये 
को

शनिवार, 14 जनवरी 2017

547..... खिचड़ी



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सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

अरवा चावल ,तील ,गुड़ ,अदरक
मिश्रण प्रसाद में खिलाते रिश्ते उपचारक

दही-चुडा ,लाई ,तिलकुट के संग
मनाते भी हैं और हम आज खाते भी हैं 
















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पतंग



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मकर संक्रांति की असीम शुभकामनायें



फिर मिलेंगे ... तब तक के लिए

आखरी सलाम


विभा रानी श्रीवास्तव





शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

546.....विश्व हिन्दी दिवस और शब्द क्रमंचय संचय प्रयोग सब करते हैं समझते एक दो हैं

सादर अभिवादन
तेरहवाँ दिन
साल सत्रह का
नया तो दिखता ही नहीं
राग वही पुराना ही है

आज जो मैं पढ़ी  अब तक...


रोमन में हिन्दी लिखी, रो मन बुक्का फाड़।
देवनागरी स्वयं की, रही दुर्दशा ताड़।
रही दुर्दशा ताड़, दिखे मात्रा की गड़बड़।
पाश्चात्य की आड़, करे अब गिटपिट बड़ बड़।

सुनार कहे वह सोना, डॅाक्टर बताये वह दवाई और मैडिकल स्टोर वाला माँगे वही दवा का दाम - यही नियति रही है हम लोगों की। मगर कुछ युग-दृष्टा ऐसी नियतियों को तोड़ते भी हैं। जिन दिनों हिन्दुस्तान टू जी थ्री जी फोर जी एट्सेक्ट्रा से गुज़र रहा था उन्हीं दिनों एस वी सी फाउण्डेशन वृहत्तर सामाजिक लाभार्थ कुछ करने के प्रयत्नों में लगा हुआ था। 

दिल में दर्द बहुत है लेकर थोड़ा मरहम आ जाओ
वक़्त नहीं होगा तुम पर तुम जो है वापस ले जाओ ।

अश्क़ो की जागीर भरी है थोड़े मोती हैं बाकी
छोटा सा झोला भर लो और बाकी फेक चली जाओ।

मुझे रहने दो मेरे घर मे अकेले
ये बखूबी जनता है मेरे मिज़ाज
जब भी ख्याल बिखरते हैं
बटोर कर सहेज लेता है उन्हें

कलियाँ बनकर पुष्प, आखिर झड़ रही,
वक्त की इस बेरहम, तलवार से ।।

हूँ   तड़प   उठता ,  अकेले  में  कभी,
क्या मिलेगा जिंदगी के , सार से।।

क्यूँ दौड़ लगाऊँ भला तुम्हे पाने को 
तुम तो चल ही रही हो ऊँगली पकडकर मेरी 
मैं चाहूं तो भी ..नहीं थाम सकती तुम्हे 
सबकुछ तुम चाहो तभी तक  

तनाव ओढ़ता है और तनाव ही बिछाता है
सुना है नौकरी करने कार्पोरेट दफ्तर जाता है।

नफे,नुकसान का सजा बाजार है हरदम
रेशमी बातों से यहाँ कारोबार किया जाता है

आज का शीर्षक क्या कह रहा है देखिए ज़रा..
सारे वादों के 
ऊपर का 
वाद होता है 
‘उलूक’ 
तेरे जैसे 
कई होते हैं 
अवसर 
मिलता है 
और 
दूसरों को 
देख हमेशा 
आँख मलते हैं 

आज्ञा दें यशोदा को
सादर














गुरुवार, 12 जनवरी 2017

545...राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं...


जय मां हाटेशवरी...
आज 12 जनवरी है...

हर वर्ष 12 जनवरी को भारत में पूरे उत्साह और खुशी के साथ राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस या स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस) मनाया जाता है। इसे आधुनिक भारत के
निर्माता स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को याद करने के लिये मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने के लिये
वर्ष 1984 में भारतीय सरकार द्वारा इसे पहली बार घोषित किया गया था। तब से (1985), पूरे देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में इसे मनाने की शुरुआत हुई।



असफलता पै नसीहतें नश्तर सा लगता है
स्याह गुजरता पल शैल-संस्तर सा लगता है
बढ़ाता आस तारीफ पुलिंदा अग्नि-प्रस्तर सा
जन्म लेता अवसाद दिवसांतर सा लगता है
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जैसे ही वो नौकरी के लिए बोलने का प्रयत्न करते उनके मुंह से देश सेवा और सद्बुद्धि प्राप्त करने की बात ही निकलती |अंत में वे परमहंस के पास आये सारी घटना
उनको बताई तब परमहंस बोले तुम्हारा जन्म एक ऊँचे उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हुआ| परमहंस ने उन्हें अपना शिष्य बना लिया और उनके सान्निध्य में रहकर नरेंद्र
ने आध्यात्म के कई सोपान पार किये एवं उनकी सूक्ष्म उपस्थिति आज भी हमारा मार्ग दर्शन कर रही है| स्वामी विवेकानंद हम युवाओं के लिए एक कुछ महत्वपूर्ण काम छोडकर
गये है | उन्हें गये हुए एक शताब्दी से ज्यादा समय हो गया लेकिन उनका काम अभी भी अधूरा है जिसे हमने पूरा करना है और वो कार्य क्या है की हम जहां है जैसे है
कुछ श्रेष्ठ कार्य करें, समाज और राष्ट्र का उत्थान हो ऐसा कार्य करें | स्वामी जी ने अपने जीवन काल में जब की देश गुलाम था और समाज में अस्पृश्यता, जातिवाद,
अन्धविश्वास, जैसी कुरीतियाँ व्याप्त थी और राजे रजवाड़े मार काट में लगे हुए थे उस समय विवेकानंद ने कहा था मैं अपनी आँखों से देख रहा हूँ के भारत वर्ष फिर
से विश्वगुरु के पद पर आसीन होने जा रहा है उनकी अंतर दृष्टि कितनी सूक्ष्म रही होगी|
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प्रख्यात अमेरिकी लेखक डैन ब्राउन का उपन्यास Deception Point भी इसी तरह की वैज्ञानिक धोखाधड़ी से संबंधितहै.उनका कथानक नासा की पृष्ठभूमि में है.अमेरिका में
राष्ट्रपति के चुनाव होने वाले हैं और नासा के लगातार विफल मिशन के कारण उसके बजट में भरी कटौती कर दी जाती है.निवर्तमान राष्ट्रपति नासा के समर्थक हैं जबकि
चुनाव  में उनके प्रतिद्वंदी नासा के भारी-भरकम बजट के आलोचक  हैं और लोगों के सामने इसकी विफलताओं को पेश करते रहे हैं.
नासा के वैज्ञानिक नासा और निवर्तमान राष्टपति की गिरते साख को बचाने के लिए एंटार्कटिका में बर्फ के कई फीट नीचे एक रहस्मय चट्टान के मिलने का दावा करते हैं
जो एक करोड़ वर्ष पुरानी और दूसरे ग्रह से आई प्रतीत होती है.नासा के वैज्ञानिकों की साख फिर से बढ़ जाती है और दुनियां भर के तमाम वैज्ञानिक इसकी जांच-पड़ताल
में जुट जाते हैं.जांच में कई नए तथ्य मिलते हैं जो बताते हैं की यह चट्टान मानव निर्मित है और इसे प्रयोगशाला में बनाकर एंटार्कटिका में बर्फ में ड्रिल कर
काफी नीचे दबा दिया गया था.
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आखिर किताबों की तब्दील से हुई विद्या से गहरी पहचान 
विद्या की वृद्धि के आकर्षण से दिलोदिमाग में छा गई इम्तिहान  ...
अध्ययन, तर्क-वितर्क, कद्र किए संपादक बना हैं दिमाग
कमाई की सबब बनी किताब, बना जीवन प्रज्वलि‍त चिराग
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भारतीय राजनीतिक इतिहास के क्षितिज पर 2 अक्टूबर 1904 ई० को वाराणसी के मुगलसराय में पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एवं माता रामदुलारी देवी के घर सादगी, सौम्यता,ईमानदारी
और कर्तव्यपराणयता की प्रतिमूर्ति भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म हुआ था।असहयोग आन्दोलन में जेल यात्रा के साथ स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में उनकी
सक्रिय भागीदारी की शुरुआत हुई।भारत की आजादी की लड़ाई में 1930 ई० से 1945 ई० के बीच शास्त्री जी ने लगभग 9 वर्ष जेल में व्यतीत किए।स्वतंत्रता प्राप्ति के
पश्यात उ० प्र० के प्रथम मुख्यमंत्री पंड़ित गोविन्द बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में पहली बार शास्त्री जी ने उ० प्र० के गृहमंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक पहचान
बनाई।1951 ई० में शास्त्री जी अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव चुने गये।शास्त्री जी के कुशल नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने पहला आम चुनाव लड़ा
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1.
गाते हो गीत क्यूँ, दिल पे क्यूँ हाथ है
खोए हो किस लिये, ऐसी क्या बात है
ये हाल कब से तुम्हारा हो गया
आँखों ही आँखों में इशारा हो गया
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कोई इक बात नहीं जो मुझसे दूर हुआ हो अब तक
मंजिल दूर बहुत है लेकिन फासलें कम नजर आये




धन्यवाद।


बुधवार, 11 जनवरी 2017

544.....आहा.... मेरा पेड़

सादर अभिवादन
आज ग्यारह जनवरी है
वर्ष भी याद है : सन उन्नीस सौ छियासठ
जगह भी याद है : ताशकन्द
पुण्यतिथि है आज पूर्व प्रधान मंत्री
आदरणीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की
शत शत नमन उन्हें....
कुछ ज़ियादा तो नहीं पढ़ा आज...

इस ब्लॉग में पहली बार....
कविता भी अपना रूप बदल रही 
ठहरो तो, अंधेरा जरूर मिटेगा 
रात के साथ परछाइयाँ भी 
गुम हो जाएँगी दिन के 
निकलने से पर अभी 
एक लड़ाई बाकी है  
इस फासले का,
द्वंद्व का     
उजाले के 
सफर में,   
रात को 
गुजर 
जाने 
दो
यूँ
ही



मैंने आज खुद को किताबो के,
बाजार में देखा,
मोल मिल गया उन शब्दों को,
जो मेरे लिए अनमोल थे,
सभी पढ़ रहे है तुमको,
इक सिवा तुम्हारे,सभी जानते है,

किवाड़ों से वो देखता रहा उन्हें दिन-रात यहाँ 
दिल की दीवारों पे कब दस्तक दें पता न चले 

इंसान घिरा रहता आशंकाओं से इंसान के प्रति
फ़क़ीरों में या इंसानों में कौन है यह पता न चले  

हर बात की एक बात है कि प्रेम का ओहदा सबसे ऊपर है......समाज की मान्यताओं से कहीं ज़्यादा ऊपर| तभी तो कृष्ण और राधा के रिश्ते को कृष्ण और रुक्मणी के वैवाहिक संबंधों के मुकाबले बहुत ऊंचा दर्ज़ा प्राप्त है| गर्गसंहिता के मुताबिक जिस तरह पार्वती शिव की शक्ति है उसी तरह राधा कृष्ण की शक्ति हैं| कृष्ण के प्रति राधा का प्रेम निस्वार्थ भाव से था....कहते हैं एक बार रुक्मणी ने कृष्ण को गर्म दूध पीने के लिए दे दिया था तब राधा के तन पर छाले पड़ गए थे......
प्रेम ना बाड़ी उपजे । 
प्रेम ना हाट बिकाय ॥

आज का शीर्षक...
कानून 
किसी को भी 
नहीं पढ़ाये जाते हैं
बड़े छोटे 
का कोई भेद
नहीं किया जाता है
कभी कभी 
उल्लू को भी
राजा बनाया जाता है

आज्ञा दें दिग्विजय को





मंगलवार, 10 जनवरी 2017

543...ज़िन्दगी एक भूल है शायद

जय मां हाटेशवरी...
आज वर्ष 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है...
आज राजेन्द्र टोकी जी का जन्म दिवस भी हैं...
इस लिये इन की लिखी गज़ल से...
आज की प्रस्तुति का आरंभ कर रहा हूं...
सोचना ही फ़ज़ूल है शायद
ज़िन्दगी एक भूल है शायद
हर नज़ारा दिखाई दे धुँधला
मेरी आँखों पे धूल है शायद
इक अजब -सा सुकून है दिल में
आपका ग़म क़ुबूल है शायद
दिस्ती प्यार दुश्मनी नफ़रत
यूँ लगे सब फ़ज़ूल है शायद
किस क़दर चुभ रहा हूँ मैं सबको
मेरे दामन में फूल है शायद





एक बार स्वामी विवेकानन्द के आश्रम में एक व्यक्ति आया जो देखने में बहुत दुखी लग रहा था । वह व्यक्ति आते ही स्वामी जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला कि महाराज मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ मैं अपने दैनिक जीवन में बहुत मेहनत करता हूँ , काफी लगन से भी काम करता हूँ लेकिन कभी भी सफल नहीं हो पाया । भगवान ने मुझे ऐसा नसीब क्यों दिया है कि मैं पढ़ा लिखा और मेहनती होते हुए भी कभी कामयाब नहीं हो पाया हूँ,धनवान नहीं हो पाया हूँ ।

वर्ष नया मंगलमय कहने
आज तूलिका निरुत्साह है उदासीनता के पट पहने
नहीं चाहती बाहर निकले, वर्ष नया मंगलमय कहने
विगत वर्ष के आने पर कितनी मन्नतें मनायीं  थीं
फलीभूत  हो सकी न कोई कितने कष्ट पड़े सहने
सद्भाव आपसी नष्ट हो गया कैसे फिर आगे बढ़ पाते
उड़ने के पहले काट दिए हों  जैसे पंखी के पखने
सदा सत्य पथ पर चलकर घनघोर तिमिर से लड़ने का
संकल्प ह्रदय जो बांधा था, लगा तीव्रता से ढहने

प्राचीनकाल की ओर देखें तब भारत में ज्ञान प्रदान करने वाले गुरु थे, अब शिक्षक हैं। शिक्षक और गुरु में भिन्नता है। गुरु के लिए शिक्षण धंधा नहीं, बल्कि आनंद है, सुख माना जाता था शिक्षण संस्थाए कर्तव्योंन्मुख होती थी ।गुणवतापुर्ण शिक्षा तभी सम्भव है जब कि युवाओं को भारतीय दर्शन की अनिवार्य शिक्षा दिया जाय। बच्चों को कम से. कम गीता का कर्म विज्ञानं और बौध. दर्शन की शिक्षा दिया जाय ताकि मानव का निर्माण हो सके। आशा नहीं विशुद्ध प्रयास न होने के कारण समाज मे हिंसा और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहता है।

‘उलूक’
सब इसी
तरह से
ही चलेगा
तुझे मिला
तो है काम
दीवारें
पोतने
का यहाँ
तू भी
दो चार
लाईनेंं
काली
सफेद
खींचते हुए
पागलों
की तरह

स्वर्ग की अप्सरा सी परी बेटियां
सृष्टि के चक्र की हैं धुरी बेटियां ।।
बेटियां साधना तो पिता संत है
ये पुरुष के अहंकार का अंत है
हर पुरुष वृक्ष तो बेटियां छाँव हैं
है पुरुष शीश तो बेटियां पाँव हैं

4. प्रोडक्ट हमेशा प्रचलित वेबसाइट्स से ही  और सेलर के  रिव्यु भी पढ़ें, क्योंकि आजकल कई सेलर्स ऑनलाइन धोखाधड़ी भी कर रहें हैं।
5. प्रोडक्ट खरीदने का सबसे अच्छा वक़्त होता है सेल। आजकल लगभग हर छोटे-बड़े त्योहारो पर इ- कॉमर्स कंपनियां सेल दे रही हैं। और सेल में सामान्यतः प्रोडक्ट अपनी रोज की कीमतों से सस्ते बिक रहे है, तो आप इन ऑफर्स का फायदा उठा सकतें हैं।

1960 के दशक में खुराना ने नीरबर्ग की इस खोज की पुष्टि की कि डी.एन.ए.  अणु के घुमावदार ‘सोपान’ पर चार विभिन्न प्रकार के न्यूक्लिओटाइड्स के विन्यास का तरीका नई कोशिका की रासायनिक संरचना और कार्य को निर्धारित करता है। डी.एन.ए. के एक तंतु पर इच्छित अमीनोअम्ल उत्पादित करने के लिए न्यूक्लिओटाइड्स के 64 संभावित संयोजन पढ़े गए हैं, जो  प्रोटीन  के निर्माण के खंड हैं। खुराना ने इस बारे में आगे जानकारी दी कि न्यूक्लिओटाइड्स का कौन सा क्रमिक संयोजन किस विशेष अमीनो अम्ल को बनाता है। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि न्यूक्लिओटाइड्स कूट कोशिका को हमेशा तीन के समूह में प्रेषित किया जाता है, जिन्हें प्रकूट (कोडोन) कहा जाता है। उन्होंने यह भी पता लगाया कि कुछ प्रकूट कोशिका को प्रोटीन का निर्माण शुरू या बंद करने के लिए प्रेरित करते हैं।



आज बस इतना ही...
धन्यवाद।














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